Love is never lost!
Love is never lost, not by distance, not by separation , not even by death. Love lasts for ever.
Love is never lost, not by distance, not by separation , not even by death. Love lasts for ever.
Posted by B K Singh at 1:41 PM
पाखी पाखी परदेसी
पाखी पाखी परदेसी
आये अजनबी, तू भी कभी
आवाज दे कही से
मैं यहाँ टुकडों में जीं रहा हू
तू कही टूकडों में जीं रही है
रोज रोज रेशम सी हवा
आते जाते कहती हैं पता
वो जो दूधधूली, मासूम कली
वो हैं कहा, कहा है
वो रोशनी कहा है
वो जान सी कहा है
मैं अधूरा, तू अधूरी जीं रही है
तू तो नहीं है, लेकिन तेरी मुस्कराहट है
चेहरा कही नहीं है, पर तेरी आहटे है
तू हैं कहा, कहा है
तेरा निशाँ कहा है
मेरा जहाँ कहा है
मैं अधूरा, तू अधूरी जीं रही है
बफा जो तुमसे कभी मैंने निभाई होती
उम्र ना मुफ़्त में सड़कों पे ना गवाईं होती
सांप यादों के हैं डंसते मुझे हर शाम - ओ - सहर
ये जो सोते तो मुझे नींद भी आयी होती
तेरी चौखटसे जो उस रोज ना आया होता
मैं खुदा होता दुनियाँ पे खुदाई होती
होती गैरत तो तेरे साथ ही मर जाते सजन
लाश कांधों पे यूँ ना उठायी होती
हाथ क्या आया मेरे एक सियाही के सिवा
देखने हाल मेरा तू भी आयी होती
जिंदगी जब भी तेरी बज्म मॆं लाती है हमे
ये जमीं चांद से बेहतर नजर आती है हमे
सुर्ख फूलों से महक उठती है दिल कि राहे
दिन ढले यूं तेरी आवाज बुलाती है हमे
याद तेरी कभी दस्तक , कभी सर्गोशी से
रात के पिछले रोज जगाती है हमे
हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमे
आरजू थी हमें इतना जहक से मौत मिल जाये
सारी दुनियाँ में किसी से तो मोहब्बत मिल जाये
जितेजी पाया ना कुछ हम ने
जमानेवालो, अब जनाजे को तो रुख्सत की इजाजत मिल जाये
पूँछ रहें हैं पूँछनेवाले
लेकिन हम बतलाए क्या
दाग ये दिल ने पाए हैं कैसे
उन को हम समझाए क्या
कितने दाग हैं इस दामन में
कितने दाग हैं माथेपर
जो हम को अपना सकते थे
सच हैं हमें अपनाए क्या
जो अपनों की बस्ती थी
अब नगरी हैं बेगानों की
कौन यहाँ हैं सुननेवाला
दिल की बात सूनाए क्या
पत्थर अब क्या फेंक रहे हो
हम पहले से ही जख्मी हैं
दिल पर कितने जख्म लगे हैं
छोडो तुम्हें गिनवाए क्या
वादा कर के निभानेवाले कम होते हैं
इश्क ना करना, इश्क में गम ही गम होते हैं
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
मुझे जिस से हैं मोहब्बत, उसे हैं अजब ये आदत
कभी मुँह को फेर लेना, कभी गुफ्तगू ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
मैने चाहा था किसी को, मेरा हाल क्या हैं देखो
जो किया कसूर मैंने वही तुम कबहू ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
मेरी हो अगर बुराई, तो ना देना तुम सफाई
मेरे साथ खुद को रूसवां कभी कुबकू ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
कोई पूछें बदनसिबी की हैं इंतहा भी कोई
तो मेरी मिसाल देना, तुम मुझे ना-मुँह ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना