Friday, April 20, 2007

On Request!

मुझसे बिछड के खुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूठे हो

इक टहनी पर चांद टिका था
मैं ये समझा तुम बैठे हो

उजले उजले फूल खिले थे
बिल्कुल जैसे तुम हंसते हो

मुझे शाम बता देती है
तुम कैसे कपडे पहने हो

तुम तन्हा दुनिया से लडोगे
बच्चों सी बातें करते हो