परदेसी
पाखी पाखी परदेसी
पाखी पाखी परदेसी
आये अजनबी, तू भी कभी
आवाज दे कही से
मैं यहाँ टुकडों में जीं रहा हू
तू कही टूकडों में जीं रही है
रोज रोज रेशम सी हवा
आते जाते कहती हैं पता
वो जो दूधधूली, मासूम कली
वो हैं कहा, कहा है
वो रोशनी कहा है
वो जान सी कहा है
मैं अधूरा, तू अधूरी जीं रही है
तू तो नहीं है, लेकिन तेरी मुस्कराहट है
चेहरा कही नहीं है, पर तेरी आहटे है
तू हैं कहा, कहा है
तेरा निशाँ कहा है
मेरा जहाँ कहा है
मैं अधूरा, तू अधूरी जीं रही है
2 comments:
Nice song from Asoka. wish 'someone' is reading it.
ok i mean the song from Dil SE...not from asoka..
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