Friday, April 4, 2008
हिमादि तुंग श्रृंग से
हिमादि तुंग श्रृंग से
प्रबुद्ध शुद्ध भारती -
स्वयं प्रभा समुज्ज्वला
स्वतन्त्रता पुकारती -
अमत्र्य वीर पुत्र हो , दृढ- प्रतिज्ञ सोच लो ,
प्रशस्त पुण्य पंथ है - बढे चलो , बढे चलो !
असंख्य किर्तिशिमयां,
विकीर्ण दिव्यदाह - सी ,
सपूत मातृ- भूमि के -
रुको ना शुर साहसी !
अराति - सैन्य - सिंधु मे सुवाडवाग्नि से चलो ,
प्रवीर हो , जय बनो - बढे चलो, बढे चलो
-जय शंकर प्रसाद
Posted by B K Singh at 2:05 PM
परिचय
सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं
स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं
बँधा हूँ, स्वपन हूँ, लघु वृत हूँ मैं
नहीं तो व्योम का विस्तार हूँ मैं
समाना चाहता है, जो बीन उर में
विकल उस शुन्य की झनंकार हूँ मैं
भटकता खोजता हूँ, ज्योति तम में
सुना है ज्योति का आगार हूँ मैं
जिसे निशि खोजती तारे जलाकर
उसीका कर रहा अभिसार हूँ मैं
जनम कर मर चुका सौ बार लेकिन
अगम का पा सका क्या पार हूँ मैं
कली की पंखडीं पर ओस-कण में
रंगीले स्वपन का संसार हूँ मैं
मुझे क्या आज ही या कल झरुँ मैं
सुमन हूँ, एक लघु उपहार हूँ मैं
मधुर जीवन हुआ कुछ प्राण! जब से
लगा ढोने व्यथा का भार हूँ मैं
रुंदन अनमोल धन कवि का, इसी से
पिरोता आँसुओं का हार हूँ मैं
मुझे क्या गर्व हो अपनी विभा का
चिता का धूलिकण हूँ, क्षार हूँ मैं
पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी
समा जिस्में चुका सौ बार हूँ मैं
न देंखे विश्व, पर मुझको घृणा से
मनुज हूँ, सृष्टि का श्रृंगार हूँ मैं
पुजारिन, धुलि से मुझको उठा ले
तुम्हारे देवता का हार हूँ मैं
सुनुँ क्या सिंधु, मैं गर्जन तुम्हारा
स्वयं युग-धर्म की हुँकार हूँ मैं
कठिन निर्घोष हूँ भीषण अशनि का
प्रलय-गांडीव की टंकार हूँ मैं
दबी सी आग हूँ भीषण क्षुधा का
दलित का मौन हाहाकार हूँ मैं
सजग संसार, तू निज को सम्हाले
प्रलय का क्षुब्ध पारावार हूँ मैं
बंधा तुफान हूँ, चलना मना है
बँधी उद्याम निर्झर-धार हूँ मैं
कहूँ क्या कौन हूँ, क्या आग मेरी
बँधी है लेखनी, लाचार हूँ मैं ।।
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)
Posted by B K Singh at 1:54 PM
तमन्ना मेरी!
लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शम्मा की सूरत हो खुदाया मेरी
दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा ना हो जाये
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये
हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत
ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म की शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रब
हो मेरा काम गरीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से जैंफों से मोहब्बत करना
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको
Posted by B K Singh at 1:21 PM
Only person standing on your way is you!
"Just because people treat you like a villian, or an oger or just some looser. It doesn't mean you are one. The thing that matters most is what you think of yourself. If there is some thing you really want or some one you really want to be then the only person standing on your way, is you"
- Shrek
Posted by B K Singh at 1:20 PM