जुस्तजू जिस कि थी उस को तो ना पाया हम ने , इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने
वादा कर के निभानेवाले कम होते हैं
इश्क ना करना, इश्क में गम ही गम होते हैं
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
मुझे जिस से हैं मोहब्बत, उसे हैं अजब ये आदत
कभी मुँह को फेर लेना, कभी गुफ्तगू ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
मैने चाहा था किसी को, मेरा हाल क्या हैं देखो
जो किया कसूर मैंने वही तुम कबहू ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
मेरी हो अगर बुराई, तो ना देना तुम सफाई
मेरे साथ खुद को रूसवां कभी कुबकू ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
कोई पूछें बदनसिबी की हैं इंतहा भी कोई
तो मेरी मिसाल देना, तुम मुझे ना-मुँह ना करना
मैं ना मिल सकू जो तो तुम से, मेरी जुस्तजू ना करना
तुम्हें मेरी ही कसम हैं, मेरी आरजू ना करना
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