Monday, May 7, 2007

जिंदगी

जिंदगी जब भी तेरी बज्म मॆं लाती है हमे
ये जमीं चांद से बेहतर नजर आती है हमे

सुर्ख फूलों से महक उठती है दिल कि राहे
दिन ढले यूं तेरी आवाज बुलाती है हमे

याद तेरी कभी दस्तक , कभी सर्गोशी से
रात के पिछले रोज जगाती है हमे

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमे

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