Wednesday, October 24, 2007

कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो नया निराश करो मन को

संभलो की सुयोग ना जाये चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो
अप्नाखिलेश्वर है अवलंबन को
नर हो ना निराश करो मन को

जब प्राप्त तुम्हें सब तत्वा यहाँ
फिर जा सकता है सत्वा कहाँ
तुम स्वत्वा सुधा रस पान करो
उठके अमरत्व विधान करो
दैवरूप रहो भाव कानन को
नर हो न निराश करो मन को

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं ये ध्यान रहे
सब जाये अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को

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