Friday, April 6, 2007

सोचा नहीं अच्छा-बुरा

सोचा नहीं अच्छा-बुरा, देखा-सुना कुछ भी नहीं..
मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं..

देखा तुझे, सोचा तुझे, चाहा तुझे, पूजा तुझे..
मेरी खता मेरी वफ़ा, तेरी खता कुछ भी नहीं..

जिस पर हमारी आंख ने मोती बिछाये रात-भर..
भेजा उन्हे कागज़ वोही, लिखा मगर कुछ भी नहीं..

एक शाम की दहलीज पर, बैठे रहे वो देर तक..
आंखों से की बातें बहुत, मुह से कहा कुछ भी नहीं..

1 comment:

Anonymous said...

write down that song..dont remember the exact wordings..but it goes like..tum bhi mere tarha jhoot bolte ho ki tum acche ho..something like that..of jagjit singh..i know u got that.