Thursday, March 29, 2007

Scrap from orkut (In Hindi)

आज् डब डबाते चश्मों में डूब गया कोइ ..II
हां सांसों के सिलसिले से ऊब गया कोइ ..II
ख्वाबों तक ने भि ढूंढे जिसकि आमद् के निशां,,,,
यूं अलविदा कहके क्या खूब गया कोइ..IIII
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वो दम ए आखिर पे मुस्कुराया होगा ..II
उसने अंजाम् खुद् का गुनगुनाया होगा ..II
किसि कि याद् सबब रहि होगी गर जो ,,,,
कतरा ए अश्क कोइ चश्मों से आया होगा ..IIII

Thank you very much Inder for the beautyful lines.

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